रविवार, 31 मार्च 2013

अवसरवाद ... भारत  भुमी को तोड्ने के लिये जितने अवसर वादी १ हजार सालो से जुटे है शायद ही दुनिया के  किसी और भाग मे मिलेन्गे पहले तो मुगलो ने मटिया मेट किया उसके बाद सन १९४७के बाद नेहरु और गान्धी ने किया , लेकिन दुख की बात है सारा दोष अन्ग्रेजो पर मढ दिया जाता है . उदाहरण देखे . यदी आप अपनी भारतिय सन्स्क्रिति कि सम्मान के लिये  सन्स्क्रित भाषा  को सविधान मे कुछ अधिकार देन्गे या हिन्दि को राष्ट्रभाषा बनाने के लिये पहल करेन्गे या वन्दे मातरम गीत को गायेन्गे तो विरोध मे सबसे पहले कौन आयेगा ? दुसरा यदि आप बढती जनसन्ख्या को रोकने के लिये दो बच्चो वाली नीति बनाये तो पहला विरोध किसका होगा ? निसन्देह यहा के मुसलमान ही आयेन्गे . यहा के मुसलमानो को अपने देश से प्यार नही है उसे तो अरब देशो की गन्दगी चाटने कि आदत हो गइ है . अब यहा के हिन्दुत्व को तोडने के तरिके भी देख ले .. आर्य बाहर से आये है , यहा के एस सी और एस टी मुलनिवासि है . अब इन सालो को जिसमे नेहरु भी है . विग्यान को नहि मानता और सनातन धर्म को भी नही मानता . विग्यान कहता है कि समस्त प्राणीयो का मुल निवास आफ्रिका महाद्विप है यहा से समस्त प्राणिया जिसमे मनुष्य भी है सभी महाद्विपो मे फैले है . सनातन धर्म कहता है कि सन्सार के  सभी प्राणियो का मुल  जन्म स्थान हिमालय का क्षेत्र है यहि से सभ्यता का विकास होते कालान्तर मे सभी जगह फैल गये अब उपरोक्त दोनो मे से कोइ भी बात को माने तो बाहरी और मुल निवासी का झगडा ही समाप्त समझो . लेकिन नही अवसरवादियो को अपनी रोजी रोटी चलाने के लिये मुर्खो को मुर्ख बनाने मे ही अपनि बरकत नजर आती है . अब अवसर वाद का दुसरा उदाहरण देखिये .. जाती वाद .. जवाहर लाल नेहरु के साथ उस समय जितने भी अवसरवादी राजनितिग्य थे वो सभी इस्लामी गन्दगी से सराबोर थे उन सब को मोहम्मद के गन्दगी भारत मे  फैलाने फैलाने मे अपनी विकास नजर आयी या यु कहे कि वो मुगलो का एजेन्ट ही था जिसने यहा के सभ्यता को  छिन्न भिन्न करके इस्लाम वाद का जहर फैलाये . अब इनके फैलाये जहर मे यहा के भारतिय इस कदर उलझे कि आज तक वो अपनो से ही निपटने मे सारी उर्जा नष्ट कर रहे है . कोइ अपने को ब्र्हामण मान कर छुत फैला रहा तो कोइ अपने को महाराणा प्रताप का औलाद मान कर अपने को शुरवीर समझकर  असली दुश्मन इस्लाम से अपनी सिर छुपाये अपने ही छोटे भाइयो से आरक्षण नाम पर लडाइ लड रहा है . 

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